Story

♣ कहानी ♣

कहानी यह शब्द सुनते ही हमें बचपन में सुनी बहुत सारी रोचक कहानियों की यादे ताजा हो जाती है। सांझ ढलते ही बचपन में हमें अपने बड़े-बुजुर्गों द्वारा कहानियाँ सुनने को मिलती थी। वास्तव में कथा-कहानियों के माध्यम से बच्चों, बड़ों सभी वर्गों में संस्कार दिया जा सकता हैं। कहानियों के माध्यम से गंभीर से गंभीर बात को सरल ढ़ंग से समझा व समझाया जा सकता हैं। कहानियाँ किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति के जीवन में गहरी छाप छोड़ती हैं। कहानी कहने की कला में निपुण व्यक्ति बहुत सहज भाव से अपने मन की बात दुसरे व्यक्ति को समझा सकता हैं। कहानी में सम्मोहन क्षमता होती है जितनी अच्छी कहानी होगी वह अपने श्रोता वर्ग को बांधे रखेगी।
  • किस प्रकार की कहानी किस प्रकार के आयु वर्ग के लिए उचित रहेगी उसका चयन कर कथा वर्गीकरण किया जा सकता हैं :-
1. बाल वर्ग के लिए कथाऐं
2. किशोर वर्ग के लिए कथाऐं
3. तरूण वर्ग के लिए कथाऐं
4. प्रोढ़ वर्ग के लिए कथाऐं
  •  इसी प्रकार रूची एवं प्रसंग के अनुसार कथाओं का वर्गीकरण किया जा सकता हैं:-
1. काल्पनिक कथाऐं
2. धार्मिक कथाऐं
3. क्रान्तिकारी कथाऐं
4. महापुरूषों के जीवनी पर आधारित कथाऐं
5. उत्साह वर्धक कथाऐं
6. मार्मिक (भाभुक) कथाऐं
7. ऐतिहासिक एवं पौराणिक कथाऐं
8. प्रेम कथाऐं
9. युद्ध कथाऐं
10. वर्तमान में चल रही गतिविधियों एवं प्रसंगों पर आधारित कथाऐं आदि..।
कहानियाँ हमारे नेतिक चरित्र एवं मन पर बहुत गहरा प्रभाव छोड़ती है कहानी जितनी रोचक, प्रेरक, प्रासांगिक एवं हृदय को छूने वाली
होगी उतनी ही बढि़या रहेगी।
कहानी का सार
कहानी का सार किसी भी कहानी का अन्त किसी सीख, शिक्षा अथवा अच्छी प्रेरणा देने वाला अथवा किसी अच्छे परिवर्तन के लिए दिशा देने वाला होना चाहिए। कहानी समाप्त होने पर हम कोई अच्छी बात गृहण कर सके तभी कहानी की रचना सार्थक होगी।
निवेदन
हम अधिक से अधिक कहानियां पढें व पढ़ाऐं, सुनें व सुनाऐं एवं कहानियों के माध्यम से अधिक से अधिक मात्रा में अच्छे गुण, संस्कार, अच्छी बातें सिखने का प्रयत्न करें।
धन्यवाद।