Tag: Desh prem

Motivational Story

मुझे मोक्ष नहीं चाहिये प्रसंग 1946 का है। महामना पं. मदनमोहन मालवीय जी दिल्ली से लौटकर प्रयाग रुके। स्वागतगर्ताओं की भीड़ स्टेशन पर जुटी। वे हिन्दुत्व की प्रतिमूर्ति थे, सरल, सादा जीवन, सेवा के लिए सदैव उद्यत। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सेवाओं को कौन भूल सकता है ? देश विभाजन की चर्चा सुनकर उन्हें मर्मांतक पीड़ा […]

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