गायत्री मंत्र Lyrics Mp3 Download, हिन्दी अर्थ – विस्तृत लेख

माँ गायत्री मंत्र लिरिक्स (ॐ भूर्भुवः स्वः) संस्कृत/हिन्दी में

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

Gayatri Mantra in Hindi images

श्री गायत्री मंत्र का शब्दानुसार अर्थ (Words Translation in Hindi)

संस्कृत मंत्र का शब्दशः हिन्दी अनुवाद निम्न प्रकार हैंः-

ॐ = ओमकार (प्रणव)
भूर = मनुष्यों को प्राण (जीवन) देने वाला
भुवः = दुखों का अंत (नाश) करने वाला
स्वः = सुख (खुशी/आनन्द/प्रसन्नता) प्रदाण करने वाला
तत = वह
सवितुर = सूर्य की जैसे उज्जवल
वरेण्यं= सभी से उत्तम
भर्गो- = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य- = प्रभु (ईश्वर)
धीमहि- = आत्म चिंतन (ध्यान/मेडिटेशन) के योग्य
धियो = बुद्धि
यो = जो
नः = हमारी
प्रचो- शक्ति
दयात् = हमें प्रदान करें (प्रार्थना)

भावार्थ – ॐ उस प्राणस्वरूप, दुःखों का नाश करने वाले, सुख के स्वरूप, सर्वश्रेष्ठ, सूर्य के समान तेजवान, पापों का नाश करने वाले, ईश्वर के रूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा (आत्म चिन्तन) में धारण करें। वह प्रभु (परमात्मा) हमारी बुद्धि को अच्छे मार्ग (सतमार्ग) पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

Gayatri Mantra Song (108 Times) Mp3, Audio, Video Download

आप सभी ने विभिन्न गीतकारों के द्वारा गाये गायत्री मंत्र को सुना होगा। यहाँ हम तीन प्रमुख कलाकारों के एमपी3 यूट्युब विडियों की जानकारी दे रहें हैं।

      सुरेश वाडकर
      अनुराधा पौडवाल
      शंकर महादेवन

आशा हैं आपको तीनों संगीतकारों के ओडियों पसन्द आयेगें।

सुरेश वाडकर द्वारा गायत्रीमाला एलबम 2005 में रिलिज 108 गायत्री मंत्र गीत प्रस्तुत हैः-

अनुराधा पौडवाल द्वारा “दीनांची आई रेणुका” एलबम 2004 में रिलिज 108 गायत्री मंत्र Youtube ऑडियो प्रस्तुत हैः-

शंकर महादेवन द्वारा सन् 2006 में प्रसारित ‘‘मंत्र शक्ति ।।’’ एलबम में गाये गायत्री मंत्र गीत का यूट्युब विडियों प्रस्तुत हैः-

  • गायत्री मंत्र की रिंगटोन हेतु आप एपी3 डाउनलोड़ कर सकते हैं एवं डायलटोन हेतु अपने नेटवर्क सर्विस प्रोवाईडर से अथवा उनकी कम्पनी की ऐप से सर्विस प्राप्त कर सकते हैं।

गायत्री मंत्र की रचना का इतिहास या स्त्रोत

पहली बार इस शक्तिशाली मंत्र को सुनने पर अथवा इस मंत्र के विषय में चर्चा होने पर स्वाभाविक ही किसी भी मनुष्य के मन में कुछ प्रश्न उत्पन्न होते होगें। जैसेः-

  • गायत्री मंत्र की रचना किसने की?
  • कौनसे वेद में गायत्री मंत्र का उल्लेख हैं?
  • मंत्र का उच्चारण कितनी बार करना चाहिए?
  • इस मंत्र का जाप कितनी बार करने से लाभ होता हैं? आदि

benefits of chanting Gayatri Mantra om bhur bhuva swaha 108 times

विकिपीडिया में विभिन्न विद्धानों द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार, गायत्री मंत्र की रचना यजुर्वेद एवं ऋग्वेद के मेल से हुई मानी जाती हैं। यजुर्वेद से इस मंत्र का प्राम्भिक भाग ‘ऊँ भूर्भवः स्वः’ लिया गया है तथा शेष भाग ऋग्वेद के छन्द संख्या 3.62.10 से लिया गया हैं। इस मत्र का संबंध हिन्दू देवी गायत्री से माना जाता हैं। वैसे तो मंत्र का जाप कभी भी कर सकते है परन्तु स्नान के पश्चात् पूजा कक्ष में सुखासन में बैठकर 108 बार अथवा 3 माला का जाप अति फलदायी होता हैं।

आप हमारी वेब साईट से सूर्य नमस्कार हिन्दी लिरिक्स एवं सूर्यनमस्कार से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Bhojan Mantra – Om Sahana Vavatu (विभिन्न भोजन मंत्र Hindi अर्थ सहित)

Om sahana vavatu bhojan mantra, Arya Samaj bhojan mantra, RSS bhojan mantra and other Sanskrit mantras which should be spoken before having the meal.

All mantra available in Sanskrit with Hindi meaning.

Some mp3, video also available for your help.

प्रथम भोजन मंत्र (Anna Grihana Karne Se Pehle) :-

अन्न ग्रहण करने से पहले विचार मन में करना है
किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है
हे परमेश्वर एक प्रार्थना नित्य तुम्हारे चरणो में
लग जाये तन मन धन मेरा विश्व धर्म की सेवा में


Bhojan Mantra Video

Anna Grihana Karne Se Pehle Vichar Man Me karna hai
Kis Hetu Se Iss Sharir ka Rakshan Poshan Karna hai
Hai Parmeshvara Ek Prarthana Nitya Tumhare charno me
Lag Jaye Tan Man Dhan Mera Vishva Dharma Ki Seva main…

द्वितीय भोजन मंत्र (Brahmarpranam Brahma havir) :-

ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्मा हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणाहुतं
ब्रह्मैव तेना गन्तव्यंब्रह्म कर्म समाधिना

Brahmarpranam Brahma havir Brahmagnau Brahmana hutam
Brahmaiva tena gantavyam Brahma karma samaadhinaa

विशेष:- अनेक स्थानों पर इस मंत्र का उच्चारण ॐ के बिना प्रारम्भ करते हैं।

तृतीय भोजन मंत्र (Om sahana vavatu saha nau bhunaktu) :-

ॐ सहनाववतुसहनौ भुनक्तु
सहवीर्यं करवावहै तेजस्विनावधीतमस्तुमा विद्विषा वहै
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

Om sahana vavatu saha nau bhunaktu, saha veeryam karavaavahai
Tejasvinavadhitamastu ma vidvisha vahai
Om shantih, shantih shantih

आर्य समाज भोजन मंत्र (Arya Samaj Bhojan Mantra) :-

आर्य समाज में भोजन से पूर्व जिस मंत्र का उच्चारण प्रार्थना के रूप में किया जाता हैं निम्न प्रकार हैं:-

ओ३म् अन्नपते अन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।

प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे ।।

आर्य समाज के भोजन मंत्र में आये शब्दों का शब्दार्थ:-

नः – हम/हमारे | अन्नपते – अन्न के स्वामी भगवन् ! | अनमीवस्य – कीट आदि रहित | शुष्मिणः – बलकारक (बल प्रदान करने वाला) | अन्नस्य – अन्न के भण्डार | देहि/धेहि – दीजिये | प्रदातारं – अन्न का खूब दान देने वाले को | प्रतारिष – दुःखो से दूर कीजिए | द्विपदे चतुष्पदे – दोपायो और चौपायो को | ऊर्जं – बल

आर्य समाज के भोजन मंत्र का भावार्थ:-

हे अन्न के स्वामी प्रभो (भगवान्)! हमारे लिए बल, बुद्धि, तेज, एवं ओज प्रदान करने वाले रोग रहित अन्न (भोजन) प्रदान करें। हे स्वामी! हमें आत्मिक शक्ति प्रदान करने वाला अन्न दिजिए जिससे जीवन आरोग्यवान् हो एवं हम सुखपूर्वक जी सकें।

Bhojan Mantra Om Sahna vavtu pdf

संघ के कार्यक्रमों व शिविरों में भोजन से पूर्व सन् 2005 से पहले पुराना भोजन मंत्र बोला जाता था जो की बहुत लम्बा था जिसके बोल निम्न प्रकार हैं:-

ॐ यन्तु नदयो वर्षन्तु पर्जन्याः।
सुपिप्पला ओषधयो भवन्तु।
अन्नवताम् मोदनवताम् माक्ष्यिवताम्।
एषाम् राजा भूयासम्।
ओदनमुद्रब्रुवते।
परमेष्ठी वा एषः यदोदनः।
परमामेवैनं श्रियं गमयति।

Om Yantu Nadayo Varshantu Parjanyaah, Supippala Oshdhayo Bhavantu,
Annavatam Odanavataam Amikshyavatam, Esham Raja Bhuuyasam
Odanmudbruvate. Parameshtii Vaa Eshah Yadodanah.
Paramaamevainam Shriyam Gamyati.

मा भ्राता भ्रातरन् द्विक्षन्।
मा स्वसार मुतस्वसा।
संयंच सव्रता भूत्वा।
वाचं वदत भद्रया।

Maa Bhrata Bhrataran Dwikshan, Maa Swasaaramutaswasa,
Samyancha Savrata Bhuutvaa, Vaacham Vadat Bhadrayaa

उपरोक्त के पश्चात् क्रमशः ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्मा… तथा ॐ सहनाववतुसहनौ भुनक्तु… वाले मंत्रों का उच्चारण भोजन मंत्र के रूप में संघ में किया जाता था।