दीपावली क्यों मनाई जाती है ! दिवाली के पांच दिनों के त्यौहार का महत्व

दिवाली का त्यौहार

दिवाली या दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय का एक धार्मिक त्यौहार है जो कि भारत वर्ष के अलावा अन्य देशों में भी मनाया जाता है। दिवाली के दिन सम्पूर्ण भारत वर्ष में सारे घरों में दिए जलाये एवं प्रकाश किया जाता है। यह भी माना जाता है कि इस दिन अपने करीबी रिश्तेदारों और प्रियजनों को उपहार दिए बिना और पूजा के बिना दिवाली का त्यौहार अधूरा है। दीपावली कि संध्या पर लोग पूजा करते हैं, नए कपडे पहनते हैं एवं आतिशबाज़ी का आनंद लेते हैं। यह त्यौहार वर्ष के सबसे सुन्दर और आनंददायक समय में से एक है। इस दिन पूरे भारत में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है ताकि समस्त देश वासी अपने अभिन्न मित्रों एवं परिवार के साथ आनंद ले सकें।

Diwali Calendar 2018 Image

दिवाली क्यों मनाई जाती है?

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, दीपावली मनाने के कई कारण हैं जैसे कि लोगों का ये मानना है कि जो वह इस त्यौहार पर करेंगे वही पूरे वर्ष करेंगे। इसीलिए धनतेरस पर खरीददारी की जाती है, लोग दोस्ती करते हैं, मिठाइयां बांटते है, घर को साफ़ करते हैं एवं सजाते हैं इत्यादि। जो शिक्षक हैं वे नियमित कक्षाएं लेते हैं और विद्यार्थी अधिक से अधिक अध्ययन करते हैं, और जो व्यवसायी हैं वे अपने खातों को ठीक कर लेते हैं।

हिन्दू पुराणों के अनुसार दीपावली मनाने के कई ऐतिहासिक कारण भी हैं जो की निम्नलिखित हैं:-

ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य रामायण के अनुसार, दीपावली के ही दिन भगवान् श्री राम वर्षों का वनवास पूर्ण करने के पश्चात एवं रावण का वध करने के बाद अपनी पत्नी सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ अपने नगर अयोध्या पहुंचे थे और इसी कारण अयोध्या निवासियों ने पूरे नगर को प्रकाशमान किया था और आतिशबाजी की और तभी से दीपावली का त्यौहार मनाये जाने लगा।

ऐसा माना जाता है की पौराणिक समय में जब असुरों और देवताओं ने समुद्र मंथन किया था तब देवी लक्ष्मी क्षीर सागर में से कार्तिक मास की पूर्णिमा को ब्रम्हांड में अवतरित हुई थी और इसी कारण से माता लक्ष्मी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में दीपावली का त्यौहार मनाया जाने लगा।

एक और पौराणिक कथा के अनुसार एक बहुत ही बलशाली राजा बाली था जो समस्त लोकों पर आधिपत्य जमाना चाहता था। उसे स्वयं भगवान विष्णु से कई शक्तियों का वरदान प्राप्त था। पूरी धरती पर दरिद्रता थी क्योंकि सम्पूर्ण धन पर राजा बाली का नियंत्रण था। तब स्वयं भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को उसके बंधन से छुड़ाया था और भगवान के बनाये नए नियमों की पालना करने के लिए तीनो लोकों को बचाया था और तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है।

एक और पौराणिक कथा के अनुसार, एक बहुत ही महान और बुद्धिमान राजा विक्रमादित्य थे जो कि काफी साहसी और पराक्रमी राजा थे। उनके राज्य के नागरिकों ने काफी भव्यता के साथ उनका राज्याभिषेक किया और उनके राजा बनने कि घोषणा कर दी और इसी दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली के 5 दिनों के त्योहारों का महत्व इस प्रकार है:-

  • दीपावली के पहले दिवस को धनतेरस कहा जाता है जिसका अर्थ है घर में धन और समृद्धि की वृद्धि होना। लोग सोने और चांदी के सिक्के, बर्तन,और अन्य वस्तुऍ इस विश्वास के साथ खरीद कर अपने घर लाते है कि घर में धन बढे।
  • दिवाली के दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी के नाम से पहचाना जाता है , जो इस विश्वास के साथ मनाया जाता है कि भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर का वध किया गया था।
  • दिवाली के तीसरे दिवस को मुख्य दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा पूरे विश्वास और उल्लास के साथ की जाती है और उनके भक्तो की सारी इच्छाएं इस दिन पूर्ण होती है
  • दिवाली के चौथे दिवस को बली प्रदा के नाम से जाना जाता है जो भगवान विष्णु की किवदंती से सम्बऩ्धित है जिन्होंने वामन का रूप धारण करने के पश्चात राक्षस राजा बलि को हराया था। बलि बहुत महान राजा था परन्तु पृथ्वी पर शासन करते हुये वह बहुत ज्यादा लालची बन गया था क्योंकि उसे भगवान विष्णु ने असीमित शक्तियों का वरदान दिया था। गोर्वधन पूजा इस विश्वास के साथ भी मनाई जाती है कि भगवान कृष्ण ने असाधारण काम करके इन्द्र के गर्व को तोडा था।
  • दिवाली के पांचवे दिवस को यम द्वितीया या भाई दूज के नाम से भी पहचाना जाता है जो मृत्यु के देवता “यम” और उनकी बहन यामी के प्यार भरे रिश्ते के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि आज ही के दिन राजा यम अपनी बहन से मिलने आए थे और उन्होंने साथ में खाना भी खाया था। लोग इस दिन को बहन और भ्राता के एक दूसरे के प्रति स्नेह और प्रेम के रूप में मनाते है।

गायत्री मंत्र Lyrics Mp3 Download, हिन्दी अर्थ – विस्तृत लेख

माँ गायत्री मंत्र लिरिक्स (ॐ भूर्भुवः स्वः) संस्कृत/हिन्दी में

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

Gayatri Mantra in Hindi images

श्री गायत्री मंत्र का शब्दानुसार अर्थ (Words Translation in Hindi)

संस्कृत मंत्र का शब्दशः हिन्दी अनुवाद निम्न प्रकार हैंः-

ॐ = ओमकार (प्रणव)
भूर = मनुष्यों को प्राण (जीवन) देने वाला
भुवः = दुखों का अंत (नाश) करने वाला
स्वः = सुख (खुशी/आनन्द/प्रसन्नता) प्रदाण करने वाला
तत = वह
सवितुर = सूर्य की जैसे उज्जवल
वरेण्यं= सभी से उत्तम
भर्गो- = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य- = प्रभु (ईश्वर)
धीमहि- = आत्म चिंतन (ध्यान/मेडिटेशन) के योग्य
धियो = बुद्धि
यो = जो
नः = हमारी
प्रचो- शक्ति
दयात् = हमें प्रदान करें (प्रार्थना)

भावार्थ – ॐ उस प्राणस्वरूप, दुःखों का नाश करने वाले, सुख के स्वरूप, सर्वश्रेष्ठ, सूर्य के समान तेजवान, पापों का नाश करने वाले, ईश्वर के रूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा (आत्म चिन्तन) में धारण करें। वह प्रभु (परमात्मा) हमारी बुद्धि को अच्छे मार्ग (सतमार्ग) पर चलने की शक्ति प्रदान करें।

Gayatri Mantra Song (108 Times) Mp3, Audio, Video Download

आप सभी ने विभिन्न गीतकारों के द्वारा गाये गायत्री मंत्र को सुना होगा। यहाँ हम तीन प्रमुख कलाकारों के एमपी3 यूट्युब विडियों की जानकारी दे रहें हैं।

      सुरेश वाडकर
      अनुराधा पौडवाल
      शंकर महादेवन

आशा हैं आपको तीनों संगीतकारों के ओडियों पसन्द आयेगें।

सुरेश वाडकर द्वारा गायत्रीमाला एलबम 2005 में रिलिज 108 गायत्री मंत्र गीत प्रस्तुत हैः-

अनुराधा पौडवाल द्वारा “दीनांची आई रेणुका” एलबम 2004 में रिलिज 108 गायत्री मंत्र Youtube ऑडियो प्रस्तुत हैः-

शंकर महादेवन द्वारा सन् 2006 में प्रसारित ‘‘मंत्र शक्ति ।।’’ एलबम में गाये गायत्री मंत्र गीत का यूट्युब विडियों प्रस्तुत हैः-

  • गायत्री मंत्र की रिंगटोन हेतु आप एपी3 डाउनलोड़ कर सकते हैं एवं डायलटोन हेतु अपने नेटवर्क सर्विस प्रोवाईडर से अथवा उनकी कम्पनी की ऐप से सर्विस प्राप्त कर सकते हैं।

गायत्री मंत्र की रचना का इतिहास या स्त्रोत

पहली बार इस शक्तिशाली मंत्र को सुनने पर अथवा इस मंत्र के विषय में चर्चा होने पर स्वाभाविक ही किसी भी मनुष्य के मन में कुछ प्रश्न उत्पन्न होते होगें। जैसेः-

  • गायत्री मंत्र की रचना किसने की?
  • कौनसे वेद में गायत्री मंत्र का उल्लेख हैं?
  • मंत्र का उच्चारण कितनी बार करना चाहिए?
  • इस मंत्र का जाप कितनी बार करने से लाभ होता हैं? आदि

benefits of chanting Gayatri Mantra om bhur bhuva swaha 108 times

विकिपीडिया में विभिन्न विद्धानों द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार, गायत्री मंत्र की रचना यजुर्वेद एवं ऋग्वेद के मेल से हुई मानी जाती हैं। यजुर्वेद से इस मंत्र का प्राम्भिक भाग ‘ऊँ भूर्भवः स्वः’ लिया गया है तथा शेष भाग ऋग्वेद के छन्द संख्या 3.62.10 से लिया गया हैं। इस मत्र का संबंध हिन्दू देवी गायत्री से माना जाता हैं। वैसे तो मंत्र का जाप कभी भी कर सकते है परन्तु स्नान के पश्चात् पूजा कक्ष में सुखासन में बैठकर 108 बार अथवा 3 माला का जाप अति फलदायी होता हैं।

आप हमारी वेब साईट से सूर्य नमस्कार हिन्दी लिरिक्स एवं सूर्यनमस्कार से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

राम जी की सेना चली Full Song Lyrics – Mp3 and Video Download

राम जी की सेना चली Full Song Lyrics with Ravindra Jain Bhajan

राम जी की सेना चली… इस गीत को सर्वप्रथम स्व.श्री रविन्द्र जैन जी के श्रीमुख से रामायण धारावाहिक में भजन के रूप में संपूर्ण भारतवर्ष ने सुना। इस गीत को संघ में पथ संचलन के समय भी कदम से कदम मिलाकर चलने हेतु गाया जाता है इसलिए इसे संचलन गीत भी कहा जाता हैं। आपके अभ्यास हेतु इस गीत के लिरिक्स एवं विडियों उपलब्ध कराने का छोटा सा प्रयास एवं किसी भी प्रकार की त्रुटी हेतु क्षमा प्रार्थी।

Ram Ji ki sena chali Songs Lyrics rssworldwide.com
Image 1: Ram Ji ki Sena Chali Ravindra Jain Bhajan

श्री राम जी की सेना चली गीत लिरिक्स

पापियों के नाश को ऽ.ऽ.ऽ धर्मं के प्रकाश को ऽ.ऽ.ऽ

पापियों के नाश को, धर्मं के प्रकाश को।
राम जी की सेना चली, रामजी की सेना चली।। श्री राम जी की सेना चली, राम जी की सेना चली…

हर हर महादेव, हर हर महादेव…

पाप अनाचार में, घोर अन्धकार में।
एक नई ज्योति जली, श्री रामजी की सेना चली।।ध्रु.।। श्री रामजी की सेना चली…

हर हर महादेव, हर हर महादेव…

निश्चिर हीन करेंगे धरती, यह प्राण है श्रीराम का।
जब तक काम न पूरा होगा, नाम नही विश्राम का।।
उसे मिटानें चलें कि जिसका, मंत्र वयम रक्षाम का।।
समय आ चला निकट राम, और रावण के संग्राम का।।

तीन लोक धन्य हैं ऽ.ऽ.ऽ देवता प्रस्सन्न हैं ऽ.ऽ.ऽ

तीन लोक धन्य हैं, देवता प्रस्सन्न हैं।
आज मनोकामना फली, श्री रामजी की सेना चली।। श्री रामजी की सेना चली…।।1।।

हर हर महादेव, हर हर महादेव…

रामचन्द्र जी के संग लक्ष्मण कर में लेकर बाण चले।
लिए विजय विश्वास ह्रदय में, संग वीर हनुमान चले।।
सेना संग सुग्रीव, नील, नल, अंगद छाती तान चले।।
उसे बचाए कौन कि जिसका, वध कराने भगवान चले।।

आगे रघुनाथ हैं ऽ.ऽ.ऽ वीर साथ साथ हैं ऽ.ऽ.ऽ

आगे रघुनाथ हैं, वीर साथ-साथ हैं।
एक से एक बलि, श्री रामजी की सेना चली।। श्री रामजी की सेना चली…।।2।।

हर हर महादेव, हर हर महादेव…

नोटः संघ में प्रायः उपरोक्त अन्तरों के पश्चात गीत समाप्त कर दिया जाता हैं।

प्रभु लंका पर डेरा डाले, जब महासागर पार हो।
कब हो सफल अभियान हमारा, कब सपना साकार हो।।
पाप अनीति मिटे धरती से, धर्मं की जाय-जाय कार हो।।
कब हो विजयी राम हमारे, कब रावण की हार हो।।

राम जी से आस है ऽ.ऽ.ऽ राम पे विश्वास है ऽ.ऽ.ऽ

राम जी से आस है, राम पर विश्वास है।
राम जी करेंगे भली, श्री रामजी की सेना चली।।श्री रामजी की सेना चली…।।3।।

हर हर महादेव, हर हर महादेव
जय भवानी, जय भवानी, जय भवानी (समाप्त…)

विशेष:-

  • यह गीत ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संघ गीत पुस्तिका के 18वें संस्करण के क्रम संख्या. 37 पृष्ठ क्रमांक. 42 पर अंकित है। गीत की लय के लिए गीत गंगा की वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते है।
  • संघ में होने वाले अनेक देश भक्ति गीत चन्दन है इस देश की माटी तपो भूमि हर ग्राम हैं व अन्य की जानकारी के लिए से RSS World Wide जुडे़ रहिए।

Ram Ji Sena Chali Song MP3 & Video Download Options

रविन्द्र जैन जी के द्वारा गाये गये रामायण धारावाहिक के अति सुन्दर भजन (Ravindra Jain Ramayan Songs) का विडियों आपकी सेवा में प्रस्तुत हैं। यहां आप इस विडियों को देख व सुन कर आनन्द प्राप्त कर सकते है तथा यूट्युब पर जाकर डाउनलोड भी कर सकते हैं।

वर्तमान समय में राम जी की सेना चली गीत के डीजे पर बजने वाले (Ram Ji ki sena chali dj song) एमपी3 व विडियों भी बहुत लोकप्रिय हो रहें हैं। कुछ व्यक्ति इस गीत का रिमिक्स साॅग भी बना कर डीजे पर बजाकर नृत्य करते हैं। ऐसा ही एक गीत आपके लिए उपलब्ध हैं।

RSS Chief Mohan Rao Bhagwat Sarsanghchalak जीवन परिचय

Mohan Rao Bhagwat (Brief Introduction of Current RSS Leader) – Biography

मोहन राव भागवत जो की वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख (RSS Leader) एवं छठे सरसंघचालक (6th RSS Chief) हैं, इनके जीवन की अभी तक की यात्रा का इस छोटे से लेख के माध्यम से वर्णन कर पाना अत्यन्त कठिन कार्य हैं। इस पोस्ट के माध्यम से श्री मोहन भागवत जी की शिक्षा, परिवार, प्रचारक जीवन एवं वर्तमान पर प्रकाश डालने का प्रयास हैं (Here is the brief introduction of RSS leader Mohan Rao Bhagwat):-

RSS Chief Mohan Rao Bhagwat Image

मोहन राव भागवत – जन्म दिनांक व स्थान (Date of Birth and Place of Birth)

मोहन राव भागवत जी का जन्म सन् 1950 में हुआ था तथा इनकी जन्म दिनांक 11 सितम्बर 1950 हैं।

इनका जन्म स्थान (Birth Place) चंद्रपुर, महाराष्ट्र हैं।

Full Name of Mohan Bhagwat (मोहन भागवत जी का पूरा नाम)

मोहन भागवत जी का पूरा नाम मोहन मधुकर भागवत हैं।

अनेक लोग इन्हें मोहन राव भागवत के नाम से जानते हैं। महाराष्ट्र की भाषा मराठी में राव का मतलब जी (उत्तर भारत का आदर सूचक शब्द) होता हैं।

वर्तमान में इनके पास संघ के सरसंघचालक का दायित्व होने के कारण स्वयंसेवक इनके नाम से पूर्व ‘परम पूजनीय’ लगाते हैं- परम पूजनीय मोहन राव भागवत

Mohan Bhagwat Surname and Caste

मोहन भागवत जन्म से स्वयं को सर्वप्रथम हिन्दू ही मानते है जाति को सिर्फ वर्ण व्यवस्था के रूप में मानते हैं। ये जातिगत भेदभाव के प्रबल विरोधी हैं।

फिर भी जानकारी हेतु मोहन जी का Surname भागवत हैं। भागवत गोत्र महाराष्ट्र की ब्राह्मण जाति का होता हैं। अतः इनकी जाति-वर्ण (Caste) ब्राह्मण हैं।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का परिवार (Family Information)

मोहन राव जी का परिवार (Family) संघ के प्रारम्भ से ही संघ से जुड़ गया था। इनके परिवार की 3 पीढ़ियां संघ से जुड़ी हुई हैं।

Mohan Bhagwat Family Picture - Wife and daughter

  • सबसे पहले भागवत जी के बाबा – श्री नानासाहेब संघ के संस्थापक आद्य सरसंघचालक केशव राव बलिराम हेड़गेवार से जुडे़।
  • मोहन जी की माता जी – श्रीमती मालती भागवत संघ के महिला संगठन इकाई राष्ट्रीय सेविका समिति की सदस्य रहीं।
  • इनके पिता – श्री मधुकर भागवत संघ के स्वयंसेवक थे।

Mohan Bhagwat Daughter and Wife

Mohan Bhagwat doesn’t have any Daughter and wife. He is unmarried. It means – NO Wife and No Daughter.

जब मोहन भागवत के परिवार की बात आती है तब कुछ नासमझ लोग इनकी पत्नि एवं पुत्री संबंधी बात करते है या अफवाह उड़ातेे है। ऐसे लोगों की जानकारी के लिए बताना उचित होगा की संघ के मुखिया भागवत संघ के प्रचारक है एवं संघ के प्रचारक बिना विवाह किये अपना जीवन संघ को समर्पित करते हैं। अर्थात् ये अविवाहित है इनके कोई पत्नि एवं पुत्री नहीं हैं।

Main Education of Mohan Rao Bhagwat

शिक्षा के क्षेत्र में श्री भागवत ने अपनी प्रारम्भिक एवं स्कूली शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् पशु चिकित्सा में स्नातक की शिक्षा अध्ययन हेतु नागपुर के वेटेनरी काॅलेज में प्रवेश लिया।

Mohan Bhagwat Education

वेटेनरी काॅलेज, से नागपुर पशु चिकित्सा में ग्रेजुएशन पूर्ण होने के पश्चात् ही ये संघ के प्रचारक बने – लोग इन्हें डाॅ. मोहन भागवत के नाम से भी जानते व सम्बोधित करते हैं।

मोहन राव का प्रचार जीवन

श्री मोहन भागवत के प्रचारक जीवन व दायित्वों का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार हैंः-

  • सन् 1975 में संघ के पूर्ण कालिक प्रचारक बने।
  • वर्ष 1977 में अकोला शहर (महाराष्ट्र) मे प्रचारक रहे।
  • सन् 1978 में नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में संघ के प्रचार के नाते कार्य किया।
  • वर्ष 1991 से 1999 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख रहे।
  • सन् 2000 में संघ की चुनाव विधि द्वारा सरकार्यवाह (महासचिव) चुने गये।
  • वर्ष 2009 में कु.सी.सुदर्शन जी ने अस्वस्थता के कारण दायित्व त्यागा तब उनके स्थान पर मोहन भागवत संघ प्रमुख (सरसंघचालक) के दायित्व पर नियुक्त हुए।

RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Security

मोहन जी भागवत को व्यक्तिगत रूप से किसी प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं हैं, परन्तु विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन के सरसंघचालक (संघ परिवार के मुखिया) होने के नाते सरकार द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से जेड प्लस सुरक्षा (Z+ security) प्रदान की गई हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था में हुए व्यय को संभवतः संघ स्वयं ही वहन करता हैं।

RSS Mohan Bhagwat Official Address

परम पूजनीय सरसंघचालक मोहन राव भागवत का केन्द्रीय कार्यालय का पता:- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय, नागपुर, महाराष्ट्र हैं।

Mohan Bhagwat Twitter, Facebook and Other Social Accounts

सादगी पूर्वक जीवन व्यतीत करने वाले मोहन राव भागवत का लेख लिखने तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक (Facebook), ट्वीटर (Twitter) आदि (वेबसाईट्स) पर अकाउन्ट नहीं हैं।

इनके द्वारा प्रेषित सूचना संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख के माध्यम से प्रसारित होती हैं। तथा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से संघ की आॅफिशियल वेब साईट पर अपलोड होती हैं।

आज भी डाक के माध्यम से प्राप्त पत्रों का उत्तर स्वयं देने का प्रयास करते हैं।

RSS Chief Mohan Bhagwat Speech Video

संघ के विभिन्न कार्यक्रमों एवं उत्सवों पर, विश्व हिन्दू परिषद जैसे संघ के अनुसांघिक संगठनों के कार्यक्रमों एवं विभिन्न सामाजिक आयोजनों पर भागवत जी के होने वाले भाषण के चलचित्र (video) संघ के प्रचार विभाग द्वारा संघ की वेब साईट पर शेयर किये जाते हैं। संघ प्रमुख भागवत जी के विजय दशमी पर होने वाला भाषण तथा विभिन्न वक्तव्यों को हम भी हमारी वेबसाईट पर शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

अभी के लिए 11 अक्टुबर 2016 को विजया दशमी पर दिया गये RSS Chief Mohan Rao Bhagwat के उद्बोधन (vijayadashami speech) का वीडियो आपके लिए प्रस्तुत हैं।

सूर्य नमस्कार मंत्र (13 Surya Namaskar Mantra Lyrics With mp3)

सूर्य नमस्कार मंत्र (Surya Namaskar Mantra Lyrics in Hindi)

सूर्य नमस्कार मंत्र भगवान आदित्य के समक्ष सूर्यनमस्कार योग करते समय बोला जाने वाला अत्यन्त अद्भुत मंत्र हैं। सामान्यतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा में होने वाले Surya Namaskar Mantra को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता हैं। Suryanamaskar Mantra सभी भाग निम्न प्रकार हैं:-

1. सूर्य प्रार्थना हेतु मंत्र – सूर्य नमस्कार प्रारम्भ करने से पूर्व बोले जाने वाला मंत्र
2. सूर्य नमस्कार करते समय बोले जाने वाले मंत्र (क्रमशः 1 से 13)
3. सूर्य नमस्कार के समापन पर उच्चारण किये जाने वाला मंत्र

Surya Namaskar Mantra

1- सूर्य नमस्कार मंत्र का प्रारम्भ (सूर्य प्रार्थना मंत्र)

सूर्यनमस्कार मंत्र का प्रारम्भ संस्कृत मंत्र ध्येय सदा सवितृमण्डल मध्यवर्ती से होता हैं जिसका उच्चाण सूर्य भगवान से प्रार्थना हेतु किया जाता हैं, मंत्र निम्न प्रकार हैं:-

सूर्य नमस्कार-मंत्रः


ध्येयः सदा सवितृमण्डल मध्यवर्ती
नारायणः सरसिजासन-सन्निविष्टः।
केयूरवान् मकर-कुण्डलवान् किरीटी
हारी हिरण्मय वपुर्धृत – शंख – चक्रः ॥

Surya Namaskar Mantra Lyrics in Hindi

Also See: Rashtriya Swayamsevak Sangh Prarthana – Namaste Sada Vatsale pdf

2- सूर्य नमस्कार मंत्र – क्रमशः 1 से 13 (12 Name of Sun)

विभिन्न स्थानों पर सूर्य नमस्कार के 12 मंत्रों (12 Surya Mantras With Name of Sun) का उच्चारण किया जाता है परन्तु वास्तविकता में सूर्यनमस्कार के 13 मंत्र होते है जो कि क्रमशः निम्नानुसार हैः-

  1. ॐ मित्राय नमः।
  2. ॐ रवये नमः।
  3. ॐ सूर्याय नमः।
  4. ॐ भानवे नमः।
  5. ॐ खगाय नमः।
  6. ॐ पूष्णे नमः।
  7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।
  8. ॐ मरीचये नमः।
  9. ॐ आदित्याय नमः।
  10. ॐ सवित्रे नमः।
  11. ॐ अर्काय नमः।
  12. ॐ भास्कराय नमः।
  13. ॐ श्री सवितृसूर्यनारायणाय नमः।
  • उपरोक्त मंत्रों को क्रमबद्ध स्मरण रखने हेतु सभी के प्रथम अक्षर को (मि.र.सू.भा.ख. – पू.हि.म. – आ.स. – अ.भा.श्री.) याद रखा जा सकता हैं।

सूर्य नमस्कार समापन मंत्र (Surya Mantra Benefits Explanation Mantra)

सूर्य नमस्कार के अंत में जिस मंत्र (संस्कृत के श्लोक) का उच्चारण किया जाता है उसमें सूर्य भगवान को नमस्कार करते हुए सूर्य नमस्कार योग व उपरोक्त अंकित मत्रों का महत्व (Benefits of Surya Namaskar Mantra) बताया जाता हैं। सूर्य नमस्कार का अन्तिम मंत्र निम्न प्रकार हैं:-

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

Surya Namaskar Mantra pdf

Surya Namaskar Mantra Meaning (सूर्य नमस्कार मंत्र का अर्थ)

  • Starting Suryanamaskar Mantra (First Mantra) Meaning:- सूर्य नमस्कार के प्रथम श्लोक में भगवान सूर्य से प्रार्थना की गई हैं।
  • 1 to 13 Name Mantra (Name of Surya Mantra) Meaning:- सूर्य नमस्कार के इस भाग में भगवान सूर्य की विभिन्न विशेषता को दर्शाने वाले पर्यायवाची 13 नामों का उल्लेख हैं।
  • Surya Namaskar Samapan Mantra (Last Mantra of Surya Namaskar) Meaning:- सूर्य मंत्र के अन्तिम श्लोक के अर्थ में बताया गया है कि, जो व्यक्ति नित्य-प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु में, प्रज्ञा में, बल में, वीर्य (वीरता) में तथा उनके तेज में वृद्धि होती है।

Surya Namaskar in English

Om
Dheya Sada SavitriMandal Madhyavarti
Narayanah Sarsija – SananniVishtah |
Keyurvaan Makar-Kundalvana Kireetee
Haari Hiranmaya Vapudhrath – Shankh – Chakrah ||

  • Om Mitraya Namah |
  • Om Ravaye Namah |
  • Om Suryaya Namah |
  • Om Bhanave Namah |
  • Om Khagaaye Namah |
  • Om Pushne Namah |
  • Om Hiranyagarbhaya Namah|
  • Om Marichye Namah |
  • Om Aadityaya Namah |
  • Om Savitre Namah |
  • Om Arkaaya Namah |
  • Om Bhaskaraya Namah |
  • Om Shree SavitraSuryNarayanaya Namah |

Aadityasya Namaskaran Ye Kurvanti Dine Dine |
Aayuh Pragya Balam Viryam Tejasteshan Cha Jayate ||

Surya Namaskar Mantra Mp3 and Youtube Video For Download

Here Some Youtube videos and mp3 available for Surya Namaskar Lyrics practice. You can download it to learn actual pronunciation of mantra.

Suryanamaskar Mantra Youtube Video

हम करें राष्ट्र आराधन Patriotic Song Mp3, Hd Video With Lyrics

हम करें राष्ट्र आराधन, तन से मन से धन से…

हम करें राष्ट्र आराधन गीत बहुत समय पहले टी.वी चैनल पर प्रसारित होेने वाले धारावाहिक चाणक्य में जन-जागरण एंव युवकों में देश भक्ति का संचार करने के लिए उपयोग में लिया गया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में यह गीत विभिन्न अवसरों पर एवं सामान्य शाखा में गाया जाता हैं।

Ham Kare Rashtra Aaradhan Patriotic Song Lyrics Pdf rssworldwide.com
Image: Ham Kare Rashtra Aaradhan Songs Lyrics

संघ में विशेषतः इस गीत को गुरू पूजन के कार्यक्रम में पूजन के समय गाया जाता है इसलिए इस गीत को पूजन गीत भी कहते हैं।

तन, मन, धन और जीवन से राष्ट्र की सेवा करने की प्रेरणा इस पवित्र गीत से मिलती हैं।

श्री गुरू पूजन गीत (Ham Kare Rashtra Aaradhan RSS Song)

हम करें राष्ट्र आराधन, तन से मन से धन से।
तन-मन-धन जीवन से, हम करें राष्ट्र आराधन।।ध्रु।।

अन्तर से, मुख से, कृति से, निश्छल हो निर्मल मति से।
श्रद्धा से मस्तक नति से, हम करें राष्ट्र अभिवादन।।1।।
हम करें राष्ट्र आराधन…

अपने हंसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से।
प्रौढ़ता पूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन।।2।।
हम करें राष्ट्र आराधन…

अपने अतीत को पढ़कर, अपना इतिहास उलट कर।
अपना भवितव्य समझकर, हम करें राष्ट्र का चिन्तन।।3।।
हम करें राष्ट्र आराधन…

है याद हमें युग-युग की, जलती अनेक घटनायें।
जो माँ के सेवा पथ पर, आयी बनकर विपदायें।।

हमने अभिषेक किया था, जननी का अरिशोणित से।
हमने श्रृंगार किया था, माता का अरिमुण्डों से।।

हमने ही उसे दिया था, सांस्कृतिक उच्च सिंहासन।
माँ जिस पर बैठी सुख से, करती थी जग का शासन।।

अब काल चक्र की गति से वह टूट गया सिंहासन।
अपना तन-मन-धन देकर, हम करें पुनः संस्थापन।।4।।
हम करें राष्ट्र आराधन…

Hum Kare Rashtra Aradhan Youtube Video Song Free Download

चाणक्य सीरियल में प्रदर्शित हम करें राष्ट्र आराधन गीत का चलचित्र (वीडियो) प्रस्तुत हैं।

संघ में होने वाले गीत की लय इससे भिन्न है। संघ की लय अनुसार ‘‘हम करें राष्ट्र आराधन’’ गीत का वीडियो लिरिक्स के साथ प्रस्तुत हैं।

विशेष:-

  • यह गीत ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संघ गीत पुस्तिका के 18वें संस्करण के क्रम संख्या. 18 पृष्ठ क्रमांक. 22 पर अंकित है। गीत की लय के लिए गीत गंगा की वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते है।
  • संघ में होने वाले अनेक देश भक्ति गीत चन्दन है इस देश की माटी तपो भूमि हर ग्राम हैं व अन्य की जानकारी के लिए से RSS World Wide जुडे़ रहिए।

Bhojan Mantra – Om Sahana Vavatu (विभिन्न भोजन मंत्र Hindi अर्थ सहित)

Om sahana vavatu bhojan mantra, Arya Samaj bhojan mantra, RSS bhojan mantra and other Sanskrit mantras which should be spoken before having the meal.

All mantra available in Sanskrit with Hindi meaning.

Some mp3, video also available for your help.

प्रथम भोजन मंत्र (Anna Grihana Karne Se Pehle) :-

अन्न ग्रहण करने से पहले विचार मन में करना है
किस हेतु से इस शरीर का रक्षण पोषण करना है
हे परमेश्वर एक प्रार्थना नित्य तुम्हारे चरणो में
लग जाये तन मन धन मेरा विश्व धर्म की सेवा में


Bhojan Mantra Video

Anna Grihana Karne Se Pehle Vichar Man Me karna hai
Kis Hetu Se Iss Sharir ka Rakshan Poshan Karna hai
Hai Parmeshvara Ek Prarthana Nitya Tumhare charno me
Lag Jaye Tan Man Dhan Mera Vishva Dharma Ki Seva main…

द्वितीय भोजन मंत्र (Brahmarpranam Brahma havir) :-

ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्मा हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणाहुतं
ब्रह्मैव तेना गन्तव्यंब्रह्म कर्म समाधिना

Brahmarpranam Brahma havir Brahmagnau Brahmana hutam
Brahmaiva tena gantavyam Brahma karma samaadhinaa

विशेष:- अनेक स्थानों पर इस मंत्र का उच्चारण ॐ के बिना प्रारम्भ करते हैं।

तृतीय भोजन मंत्र (Om sahana vavatu saha nau bhunaktu) :-

ॐ सहनाववतुसहनौ भुनक्तु
सहवीर्यं करवावहै तेजस्विनावधीतमस्तुमा विद्विषा वहै
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

Om sahana vavatu saha nau bhunaktu, saha veeryam karavaavahai
Tejasvinavadhitamastu ma vidvisha vahai
Om shantih, shantih shantih

आर्य समाज भोजन मंत्र (Arya Samaj Bhojan Mantra) :-

आर्य समाज में भोजन से पूर्व जिस मंत्र का उच्चारण प्रार्थना के रूप में किया जाता हैं निम्न प्रकार हैं:-

ओ३म् अन्नपते अन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।

प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे ।।

आर्य समाज के भोजन मंत्र में आये शब्दों का शब्दार्थ:-

नः – हम/हमारे | अन्नपते – अन्न के स्वामी भगवन् ! | अनमीवस्य – कीट आदि रहित | शुष्मिणः – बलकारक (बल प्रदान करने वाला) | अन्नस्य – अन्न के भण्डार | देहि/धेहि – दीजिये | प्रदातारं – अन्न का खूब दान देने वाले को | प्रतारिष – दुःखो से दूर कीजिए | द्विपदे चतुष्पदे – दोपायो और चौपायो को | ऊर्जं – बल

आर्य समाज के भोजन मंत्र का भावार्थ:-

हे अन्न के स्वामी प्रभो (भगवान्)! हमारे लिए बल, बुद्धि, तेज, एवं ओज प्रदान करने वाले रोग रहित अन्न (भोजन) प्रदान करें। हे स्वामी! हमें आत्मिक शक्ति प्रदान करने वाला अन्न दिजिए जिससे जीवन आरोग्यवान् हो एवं हम सुखपूर्वक जी सकें।

Bhojan Mantra Om Sahna vavtu pdf

संघ के कार्यक्रमों व शिविरों में भोजन से पूर्व सन् 2005 से पहले पुराना भोजन मंत्र बोला जाता था जो की बहुत लम्बा था जिसके बोल निम्न प्रकार हैं:-

ॐ यन्तु नदयो वर्षन्तु पर्जन्याः।
सुपिप्पला ओषधयो भवन्तु।
अन्नवताम् मोदनवताम् माक्ष्यिवताम्।
एषाम् राजा भूयासम्।
ओदनमुद्रब्रुवते।
परमेष्ठी वा एषः यदोदनः।
परमामेवैनं श्रियं गमयति।

Om Yantu Nadayo Varshantu Parjanyaah, Supippala Oshdhayo Bhavantu,
Annavatam Odanavataam Amikshyavatam, Esham Raja Bhuuyasam
Odanmudbruvate. Parameshtii Vaa Eshah Yadodanah.
Paramaamevainam Shriyam Gamyati.

मा भ्राता भ्रातरन् द्विक्षन्।
मा स्वसार मुतस्वसा।
संयंच सव्रता भूत्वा।
वाचं वदत भद्रया।

Maa Bhrata Bhrataran Dwikshan, Maa Swasaaramutaswasa,
Samyancha Savrata Bhuutvaa, Vaacham Vadat Bhadrayaa

उपरोक्त के पश्चात् क्रमशः ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्मा… तथा ॐ सहनाववतुसहनौ भुनक्तु… वाले मंत्रों का उच्चारण भोजन मंत्र के रूप में संघ में किया जाता था।

चन्दन है इस देश की माटी Song Lyrics In Hindi & English (Download)

चन्दन है इस देश की माटी, तपो भूमि हर ग्राम है… गीत

Chandan Hai is Desh ki Mati Poem in Hindi

चन्दन है इस देश की माटी, तपो भूमि हर ग्राम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है।।ध्रु.।।

हर शरीर मंदिर सा पावन, हर मानव उपकारी है
जहाँ सिंह बन गये खिलौने, गाय जहाँ माँ प्यारी है
जहाँ सवेरा शंख बजाता, लोरी गाती शाम है।।1।। हर बाला देवी की प्रतिमा…




जहाँ कर्म से भाग्य बदलते, श्रमनिष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथायें, गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहाँ का गंगाजल सा, निर्मल है अविराम है।।2।। हर बाला देवी की प्रतिमा…

इसके सैनिक समरभूमि में गाया करते गीता हैं,
जहाँ खेत में हल के नीचे, खेला करती सीता है,
जीवन का आदर्श यहाँ पर, परमेश्वर का धाम है।।3।। हर बाला देवी की प्रतिमा…

चन्दन है इस देश की माटी, तपो भूमि हर ग्राम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है…।।समाप्त।।

विशेष
  • यह गीत ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संघ गीत पुस्तिका के 18वें संस्करण के क्रम संख्या- 2 पृष्ठ क्रमांक- 6 पर अंकित है। गीत की लय के लिए गीत गंगा की वेब साइट पर भी विजिट कर सकते है।

Chandan Hai is Desh Ki Mati Video Download

इस देशभक्ति से ओत प्रोत संघ की शाखाओं पर होने वाले गीत से बाल, तरूण और वृद्ध सभी को प्रेरणा मिलती हैं। चन्दन है इस देश की माटी गीत का अत्यन्त सुन्दर विडियो देखने व डाउनलोड़ करने के लिए निचे दिये गये विडियों पर क्लिक करें :-

Chandan Hai is Desh Ki Mati Lyrics in English

Chandan Hai is Desh Ki Mati, Tapo Bhoomi Har Gram hai…
Har Bala Devi Ki Pratima, Bachha Bachha Ram Hai…[Dhruv]

Har Sharir Mandir Sa Pawan, Har Manav Upkari Hai…
Jahan Singh Ban Gaye Khilone, Gayi Jahan Maa Pyari Hai…
Jahan Savera Shankh Bajata, Lori Gati Sham Hai..[1] Har Bala Devi Ki Pratima…

Jahan Karm Se Bhagya Badalte, Shramnishtha Kalyani hai…
Tyag Aur Tap Ki Gathayen, Gaati Kavi Ki Vaani Hai…
Gyan Jahan Ka Ganga Jal Sa, Nirmal Hai Aviram Hai [2] Har Bala Devi Ki Pratima…

Iske Sainik SamarBhoomi Me Gaya Karte Geeta Hai…
Jahan Khet Me Hal Ke Niche, Khela Karti Seeta Hai…
Jeevan Ka Aadarsh Yahan Par, Parmeshvar Ka Dhaam Hai [3] Har Bala Devi Ki Pratima…

Chandan Hai is Desh Ki Mati, Tapo Bhoomi Har Gram hai…
Har Bala Devi Ki Pratima, Bachha Bachha Ram Hai…[THE END]

Chandan Hai Is Desh ki Mitti pdf
Note
  • To RSS Desh Bhakti Geet Chandan hai is desh ki mati tapobhumi har gram mp3 song free download we will provide you an HD quality mp3 download link as soon as possible.
ऐसे और अच्छे-अच्छे गीतों की जानकारी के लिए जुडे़ रहिये RSS WORLD WIDE .COM से धन्यवाद...

हिन्दु युवकों आज का युगधर्म Geet Lyrics – Hindu Song Mp3 Download

Hindu Yuvko Aaj Ka Yugdharma – Sangh Geet (Kavya Geet Laya)

 

हिन्दु युवकों आज का युगधर्म
हिन्दु युवकों आज का युगधर्म शक्ति उपासना है ।।ध्रु.।।

बस बहुत अब हो चुकी है शांति की चर्चा यहाँ पर,
हो चुकी अति ही अहिंसा-तत्व की अर्चा यहाँ पर,
ये मधुर सिद्धांत रक्षा देश की पर कर ना पाये,
ऐतिहासिक सत्य है, यह सत्य अब पहिचानना है ।।1।। हिन्दु युवकों…

हम चले थे विश्व भर को, शांति का सन्देश देने,
किन्तु जिसको बन्धु समझा, आ गया वह प्राण लेने,
शक्ति की हमने उपेक्षा, की उसी का दण्ड पाया,
यह प्रकृति का ही नियम है अब हमें यह जानना है ।।2।। हिन्दु युवकों…

जग नहीं सुनता कभी दुर्बल जनों का शांति प्रवचन,
सिर झुकाता है उसे जो, कर सके रिपु मान मर्दन,
हृदय में हो प्रेम लेकिन, शक्ति भी कर में प्रबल हो,
यह सफलता मन्त्र है करना इसी की साधना है ।।3।। हिन्दु युवकों…

यह न भूलो इस जगत में सब नहीं है संत मानव,
व्यक्ति भी है राष्ट्र भी है जो प्रकृति के घोर दानव,
दुष्ट-दानव दमनकारी शक्ति का संचय करें हम,
आज पीड़ित मातृ-भूमि की बस यही आराधना है ।।4।। हिन्दु युवकों…

 

 

हिन्दू साम्राज्य दिवस पर इस गीत को काव्य गीत के रूप में उपयोग किया जा सकता है। यह गीत ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संघ गीत पुस्तिका के 18वें संस्करण के 53 क्रमांक पर पृष्ठ संख्या 62 पर अंकित है। गीत की लय के लिए गीतगंगा की वेब साइट पर भी विजिट कर सकते है।

 

 

RSS Ki Pratigya in Hindi- सर्वशक्तिमान श्री परमेश्वर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिज्ञा – Pratigya History

 

1925 में संघ का कार्य प्रारम्भ होने के बाद प्रतिज्ञा को कार्य पद्धति में जोड़ा गया।

 

आजादी से पहले की प्रतिज्ञा संघ की वर्तमान प्रतिज्ञा से भिन्न हैं।

Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) Pratigya

संघ की वर्तमान प्रतिज्ञा का स्वरुप निम्न प्रकार है:-

 

“सर्वशक्तिमान श्री परमेश्वर…तथा अपने पूर्वजों का स्मरण कर…मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि अपने पवित्र हिंदू धर्म… हिंदू संस्कृति… तथा हिंदू समाज का संरक्षण कर… हिंदू राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने के लिए… मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घटक बना हूं… संघ का कार्य… मैं प्रमाणिकता से… निस्वार्थ बुद्धि से… तथा तन मन धन पूर्वक करूंगा… और इस व्रत का मैं… आजन्म पालन करूंगा… भारत माता की जय”

 

संघ प्रतिज्ञा पर बौद्धिक हेतु कुछ विशेष बिंदु

 

  • श्रीराम को भगवान बनाने में उनके माता-पिता के बजाय प्रतिज्ञा का योगदान। (श्री राम द्वारा की गई प्रतिज्ञा- निशिचर हीन…..)।
  • अच्छे कार्य करते समय प्रतिज्ञा सम्बल बनती हैं। भीष्म, प्रताप, शिवाजी, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाष चन्द्र बोस प्रतिज्ञा से प्राप्त सम्बल के कारण ही अपने उद्देश्य को प्राप्त कर पाये।
  • हम प्रतिज्ञा का प्रारम्भ सर्वशक्तिमान श्री परमेश्वर से करते हैं। प्रतिज्ञा में हम अपने पूर्वजों का स्मरण भी करते हैं।
  • प्रतिज्ञा व्यक्तिगत संकल्प हैं। यह केवल कण्ठस्थ ही नहीं हृदयस्थ भी हों।
  • प्रतिज्ञा मैं हम हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति तथा हिन्दू समाज के संरक्षण का व्रत लेते हैं न कि रक्षा का। (गाय द्वारा छोटे बच्चे के संरक्षण का उदाहरण)
  • हिन्दू राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति की प्रतिज्ञा। यह सर्वांगीण उन्नति ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः….’’ के भाव से ही होगी।

 

Also See: Rashtriya Swayamsevak Sangh ki Prarthana ke liye Click Here

 

  • संघ का कार्य प्रमाणिकता से करूगाँ, प्रमाणिकता का अर्थ हैं जो कहे वहीं करें।
  • मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घटक बना हूँ ना की सदस्य (शिकंजी का उदाहरण)
  • संघ का कार्य निःस्वार्थ बुद्धि से करूँगा। – स्वयंसेवक के मन में किसी प्रकार का लोभ नहीं आना चाहिए। (हनुमान जी का उदाहरण)
  • संघ का कार्य तन-मन-धन पूर्वक करूगाँ। इसमें सर्वस्व समर्पण का भाव निहित हैं।
  • संघ का कार्य आजन्म करूगाँ न कि आजीवन। (रामप्रसाद बिस्मिल का उदाहरण)।
  • हमारे द्वारा की गई प्रतिज्ञा की फलश्रुति भारत माता की जय से होगी।