holi geet

ये शहीदों की जयहिन्द बोली, ऐसी वैसी ये बोली नहीं है
इनके माथें पे खून का टीका, देखो देखो ये रोली नहीं है ||ध्रु ||
सर कटाऊँ जवानों को लेकर, चल पड़े वह हमीरा के आगे
हम है संतान राणा शिवा की, कायरों की ये टोली नहीं है।।1।।
चल दिया जब जवाँ हँसते-हँसते, माँ की ममता तड़प् करके बोली,
आओ सो जाओ लाल मेरी गोद में, अब तेरे पास गोली नहीं है।।2।।
अब विदा जाने वाले शहीदों, खून की सुर्ख पगड़ी पहनकर,
खून की आज बौछार देखी, आज रंगों की होली नहीं है ।।3।।
संघ पर आंख दिखाने वाले, भस्म हो जायेंगे सारे दुश्मन,
ये भला है कि अब तक हमने, तीसरी आँख खोली नहीं हैं।।

Author: Ganesh Kumar

नमस्कार, मेरा नाम गणेश कुमार हैं। संघ परिवार को निकट से देखने के पश्चात् इसके बारे में लिखने के लिए प्रयास कर रहा हूँ। मेरे लेखन में कुछ त्रुटियां संभव हैं। उन्हें सुधारने हेतु आपके सुझाव बहुत उपयोगी होंगे। संम्पर्क करें - [email protected]